Wednesday, June 25, 2025

दोहा

सच-झूठ की खोज में, बीता जीवनकाल।
प्रीति सही या रीति है, मन में रहा सवाल।।

उठ जाग मनुज प्रभात है,क्यों सोया मुँह बाय।
मकड़ी मुँह में आ गई,जाला दे न बनाय।।

Saturday, June 21, 2025

लालटेन युग

रोजमर्रा की तरह आज भी समय से दफ्तर पहुंच गया।अभी कुर्सी पर बैठा ही था कि एक तीव्र स्वर गूंजा- नमस्कार साहब आप तो रोशनी में AC में बैठे हैं और बाहर लालटेन युग का बवाल मचा रखा है। मैं चौका नज़र उठाई तो देखा एक आगुन्तक नमस्कार की मुद्रा में दरवाजे पर खड़े हैं।मैंने कहा आइये बैठिए पहले अपना परिचय तो दीजिए फिर आगे बात करते हैं।आप वर्मा जी हैं ना...? मैंने कहाँ जी हाँ....मैं देवेंद्र प्रताप वर्मा...। हम विजय मोहन है..शायद आपने नाम सुना होगा।हमारा जूतों का कारोबार है,लगभग 80-90 करोड़ का टर्न ओवर है सालाना हमारा।विधायक जी ने परिचय दिया होगा हमारा...विधायक जी का फोन आया होगा आपके पास।जी हाँ फोन आया था...उन्होंने बताया आपके बारे में।बताइए मैं आपकी कैसे मदद कर सकता हूँ।अरे हुज़ूर आप चाहे तो क्या नही कर सकते हैं..जलवा तो बस आपका ही है...बहुत छोटा सा काम है...गीतांजलिपुरम कॉलोनी है न..उसी के पास अपनी एक जमीन है ..उस पर बिजली के कुछ खंभे लगे हैं वही हटवा दीजिए। ठीक है आप एक प्रार्थना पत्र दे दीजिए...मैं संबंधित अवर अभियंता से सर्वे कराकर उसका एस्टीमेट बनवा देता हूँ..एस्टीमेट के प्रशासनिक अनुमोदन के बाद आप एस्टीमेट की धनराशि जमा करा दीजिएगा। आप का काम अविलंब हो जाएगा।अरे इंजीनियर साहब कहाँ एस्टीमेट के चक्कर में उलझा रहे हैं..एस्टीमेट ही बनना होता तो विधायक जी से काहे फ़ोन कराते।आप अपने स्तर से करा दीजिए। देखिए भाई साहब हमारा और कोई स्तर नही है.जब कुछ नियमानुसार ही होगा।....तो मतलब आप हमारा काम नही करेंगे..जी मैंने ऐसा तो बिल्कुल नही कहा..दो दिन का समय दीजिए...एस्टीमेट बनवा देता हूँ...उसके बाद प्रशासनिक अनुमोदन लेकर आपका का काम करवा दूंगा ..जल्द से जल्द...वही तो कह रहा हूँ...विधायक जी की बात का मान भी नही रख रहे आप तो...एस्टीमेट का पैसा हम नही देंगे...आप बिना एस्टीमेट के करवा सकते हैं तो बताइए नही तो मैं आपके सीनियर से बात करता हूँ।....बेशक आप बात कर लीजिए..लेकिन काम होगा तो नियम से ही होगा...।आपकी इसी नियमानुसार कार्यवाही के चक्कर में विभाग का निजीकरण हो रहा है..आप से बेहतर तो प्राइवेट वाले हैं तुरंत काम हो जाता है...और आप लोग दुनियाभर का नियम कानून बता कर आम जनता को गुमराह करते हैं..।सोशल मीडिया से लेकर अखबार तक लालटेन युग की अफवाह उड़ाकर तुम लोग अपनी काली कमाई और रिश्वतखोरी को बचाना चाहता हो...सरकार ठीक कर रही है...सब प्राइवेट हो जाना चाहिए।यह कहते हुए उन महोदय के चेहरे पर एक अजब सी चमक आ गई और उनका स्वर तेज हो गया मानो युद्ध से पहले ही विजयी घोषित कर दिए गए हों..

Wednesday, May 28, 2025

ये कैसा तेरा सावन है

 ये कैसा तेरा सावन है

न बारिश है न झूले हैं

न पवन झकोरे रिमझिम है

न पनियारी के मेले हैं।


खेतों में पड़ गई दरारें

पानी पानी धरा पुकारे

दिन में धूप रात में गर्मी

शीतलता की राह निहारें


पोखर ताल तलैया सूखे

बदरा जैसे नभ से रूठे

कब बरसेगी कृपा तुम्हारी

कृषक इंद्रदेव से पूछे।

सूखे की नौबत आएगी

हरियाली सब खो जाएगी।

जब मैं तुझे देखता हूं

जब मैं तुझे देखता हूं

तो यह सोचता हूं

कि यह देखना क्या है

और मैं किसे देखता हूं।


सृष्टि की हर एक चीज में

जानी पहचानी या अजीब में।


बेशक तुझे देखता हूँ

कुछ दूर से नजदीक से

स्वप्नों में या बाहों में।

पलको के द्वार पर 

या भीतर निगाहों में।

Tuesday, May 27, 2025

सवाली लगता है

यूँ अचानक खुद से खाली लगता है
तेरे दर से भटका सवाली लगता है।
फितरत से भोला औ' था बड़ा सीधा
तो अब क्यों सबको बवाली लगता है
है जिस शाख पर पंछियों की सरगम
मिला मौका तो काटने डाली लगता है।

Friday, May 16, 2025

सरकारी काम

विनय और धैर्य का अभय लगता है
सरकारी काम है समय लगता है।

Wednesday, May 14, 2025

भारी संदूक

उस शख्स के हाथ में बहुत भारी संदूक है
देख जिसकी कनपटी पर इस समय बंदूक है।
साजिशें सफलताएं या नाकामियों का बोझ है
क्या है जो बना आखिर जीवन का अवरोध है।