Saturday, October 28, 2023

मिलता नही जवाब

कुछ कुछ अच्छा लगता है
कुछ कुछ बहुत खराब
लेकिन ऐसा क्यों लगता है
मिलता नही जवाब।


मिलता नहीं जवाब


कुछ-कुछ अच्छा लगता है,

कुछ-कुछ बहुत ख़राब।


मन कभी कहता है —

"बस यहीं ठीक हूँ",

तो अगले ही पल

कहता है —

"कहीं और जाना है अब।"


भीड़ में भी

अकेलापन महसूस होता है,

और अकेले में

कभी-कभी

सबके होने का भ्रम भी।


चेहरे मुस्कराते हैं,

पर दिल —

जैसे कुछ पूछता है हर वक़्त।


कभी मौसम अच्छा लगता है,

पर हवा चुभने लगती है।

कभी अपने बहुत दूर लगते हैं,

और अजनबी…

कुछ ज़्यादा अपने।


ऐसा क्यों होता है?

ये बेचैनी सी क्यों है

बिना किसी वजह?


मैं ढूंढता हूँ जवाब —

किताबों में,

ख़ामोश रातों में,

आईनों में,

लोगों की बातों में।


पर हर बार

बस सवाल ही मिलता है,

जवाब नहीं।

No comments:

Post a Comment