Monday, February 14, 2022

तजुर्बा

मुश्किलों से जो मिला तजुर्बा बहुत खास है
वो जो सबसे दूर है वही तो सबसे पास है।

सबसे पास


मुश्किलों से

जो मिला तजुर्बा —

बहुत खास है।

वो किताबों से नहीं,

ज़ख़्मों से निकला है।


हर ठोकर,

हर ठंडी रात,

हर लंबा इंतज़ार —

एक अध्याय बन गया

मेरे भीतर।


अब जब देखता हूँ

ज़िंदगी को

तो समझ आता है —

कि जो दिखता नहीं,

वही सबसे गहरा होता है।


और

वो जो सबसे दूर है —

वही तो

सबसे पास है।


वो सपना,

जो कभी सच नहीं हुआ,

पर अब भी हर रोज़

साँस लेता है मेरे भीतर।


वो इंसान,

जो अब नाम तक नहीं लेता,

पर हर ख़ामोशी में

उसी की आवाज़ होती है।


वो सुख,

जो कभी मिला ही नहीं,

पर हर दुःख को

ढाँप लेता है जैसे कोई याद।


तजुर्बा यही सिखाता है —

कि दूरी मापी नहीं जाती

क़दमों से,

बल्कि

दिल की धड़कनों से।

Sunday, February 13, 2022

एहसास

मुझे ग़म की जरूरत नहीं है
रोने के लिए
तुम्हारे साथ होने का
एहसास ही काफी है
तुम्हारा होने के लिए।


तुम्हारे होने के लिए


मुझे

ग़म की ज़रूरत नहीं है

रोने के लिए।

आँखें

बस तुम्हारा नाम भर सुन लें

तो भी भीग जाती हैं।


मैं

हर बार कोई वजह नहीं ढूंढता —

तकलीफ़ जताने को।

कभी-कभी

बस तुम्हारा होना

इतना भारी होता है

कि दिल

अपने आप

हल्का होना चाहता है।


तुम्हारे साथ होने का एहसास ही

काफ़ी है —

तोड़ देने के लिए

उन सभी दीवारों को

जो मैंने अपने और तुम्हारे बीच

खड़ी कर रखी थीं।


मैं रोता हूँ,

पर ये आँसू

शिकायत के नहीं हैं।

ये

उस गहराई के हैं

जहाँ शब्द खत्म हो जाते हैं,

और सिर्फ़

"तुम"

बच जाते हो।


तुम्हारा होना —

कहीं दूर,

कहीं पास,

कहीं अधूरा —

पर

तुम्हारा होना ही काफी है।