घबराहट
एक अजीब सी घबराहट से घबराता है मन,
जब तुझे अपने सामने नहीं पाता है मन।
भीड़ में भी लगती है वीरान सी दुनिया,
तेरी खामोशी में डूब जाता है मन।
तेरे बिना सब कुछ होकर भी अधूरा है,
हर रंग में बस तेरा चेहरा चाहता है मन।
हर आहट पर उठ जाता है ये धड़कता दिल,
शायद तू लौट आए — यही समझाता है मन।
रात की तन्हाई में जब सब कुछ सो जाता है,
तेरी यादों का दीप जलाता है मन।
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