Wednesday, May 28, 2025

ये कैसा तेरा सावन है

 ये कैसा तेरा सावन है

न बारिश है न झूले हैं

न पवन झकोरे रिमझिम है

न पनियारी के मेले हैं।


खेतों में पड़ गई दरारें

पानी पानी धरा पुकारे

दिन में धूप रात में गर्मी

शीतलता की राह निहारें


पोखर ताल तलैया सूखे

बदरा जैसे नभ से रूठे

कब बरसेगी कृपा तुम्हारी

कृषक इंद्रदेव से पूछे।

सूखे की नौबत आएगी

हरियाली सब खो जाएगी।

जब मैं तुझे देखता हूं

जब मैं तुझे देखता हूं

तो यह सोचता हूं

कि यह देखना क्या है

और मैं किसे देखता हूं।


सृष्टि की हर एक चीज में

जानी पहचानी या अजीब में।


बेशक तुझे देखता हूँ

कुछ दूर से नजदीक से

स्वप्नों में या बाहों में।

पलको के द्वार पर 

या भीतर निगाहों में।

Tuesday, May 27, 2025

सवाली लगता है

यूँ अचानक खुद से खाली लगता है
तेरे दर से भटका सवाली लगता है।
फितरत से भोला औ' था बड़ा सीधा
तो अब क्यों सबको बवाली लगता है
है जिस शाख पर पंछियों की सरगम
मिला मौका तो काटने डाली लगता है।

Friday, May 16, 2025

सरकारी काम

विनय और धैर्य का अभय लगता है
सरकारी काम है समय लगता है।

Wednesday, May 14, 2025

भारी संदूक

उस शख्स के हाथ में बहुत भारी संदूक है
देख जिसकी कनपटी पर इस समय बंदूक है।
साजिशें सफलताएं या नाकामियों का बोझ है
क्या है जो बना आखिर जीवन का अवरोध है।