ये कैसा तेरा सावन है
न बारिश है न झूले हैं
न पवन झकोरे रिमझिम है
न पनियारी के मेले हैं।
खेतों में पड़ गई दरारें
पानी पानी धरा पुकारे
दिन में धूप रात में गर्मी
शीतलता की राह निहारें
पोखर ताल तलैया सूखे
बदरा जैसे नभ से रूठे
कब बरसेगी कृपा तुम्हारी
कृषक इंद्रदेव से पूछे।
सूखे की नौबत आएगी
हरियाली सब खो जाएगी।