Wednesday, May 28, 2025

जब मैं तुझे देखता हूं

जब मैं तुझे देखता हूं

तो यह सोचता हूं

कि यह देखना क्या है

और मैं किसे देखता हूं।


सृष्टि की हर एक चीज में

जानी पहचानी या अजीब में।


बेशक तुझे देखता हूँ

कुछ दूर से नजदीक से

स्वप्नों में या बाहों में।

पलको के द्वार पर 

या भीतर निगाहों में।

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