जब मैं तुझे देखता हूं
तो यह सोचता हूं
कि यह देखना क्या है
और मैं किसे देखता हूं।
सृष्टि की हर एक चीज में
जानी पहचानी या अजीब में।
बेशक तुझे देखता हूँ
कुछ दूर से नजदीक से
स्वप्नों में या बाहों में।
पलको के द्वार पर
या भीतर निगाहों में।
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