बदल रहा है मेरा भारत
मेरा भारत बदल रहा है।
युगों युगों से जमा हुआ था
आज हिमालय पिघल रहा है।
बदल रहा है मेरा भारत
बदल रहा है
मेरा भारत,
मेरा भारत
बदल रहा है।
फ्लाईओवरों के नीचे
भूख अब भी बैठी है,
पर ऊपर
सपनों की गाड़ियाँ दौड़ रही हैं।
स्मार्ट सिटी बन रहे हैं —
पर गाँव अब भी
पानी को तरसते हैं।
डिजिटल हो गया है देश —
पर कुछ उंगलियाँ
अब भी पढ़ना नहीं जानतीं।
युगों-युगों से
थमे हुए बादल
अब बरसने लगे हैं,
पर कुछ सूखे खेत
अब भी इंतज़ार में हैं।
और हाँ —
हिमालय भी पिघल रहा है।
शांति की तरह,
सहनशीलता की तरह,
प्रकृति की तरह।
कंक्रीट के नीचे
दबी है कोई नदी,
जो कभी गाती थी,
अब कराहती है।
बदलाव बुरा नहीं है —
पर क्या हमने
संवेदनाओं को भी
अपग्रेड कर लिया है?
कहने को
हम आगे बढ़ रहे हैं,
पर भीतर
कुछ पीछे छूटता जा रहा है।
मेरा भारत बदल रहा है —
हाँ,
पर सवाल ये है:
किधर?
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