चार बरस
Wednesday, June 25, 2025
दोहा
सच-झूठ की खोज में, बीता जीवनकाल।
प्रीति सही या रीति है, मन में रहा सवाल।।
उठ जाग मनुज प्रभात है,क्यों सोया मुँह बाय।
मकड़ी मुँह में आ गई,जाला दे न बनाय।।
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